श्रीलंका के आपराधिक जांच विभाग ने 165,000 डॉलर (करीब एक करोड़ 22 लाख रुपए) की वित्तीय धोखाधड़ी करने के मामले में देश के क्रिकेट बोर्ड के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) विमल नंदिका दिसानायके को गिरफ्तार कर लिया है। इस साल जुलाई-अगस्त में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुई घरेलू सीरीज में बोर्ड को मिलने वाली ब्रॉडकॉस्टिंग फीस (प्रसारण शुल्क) की कुछ रकम का हिसाब नहीं मिला था। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई उसी सिलसिले में की गई है।
सामने आया 41 करोड़ रुपए के गबन का मामला
इंग्लैंड के खिलाफ चल रही सीरीज में प्रसारण शुल्क में से 55 लाख डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपए) के गबन की जांच शुरू होने के बाद यह जुलाई-अगस्त में हुई सीरीज में ब्रॉडकॉस्टिंग फीस के घपले का मामला सामने आया है।
ब्रॉडकॉस्टर सोनी पिक्चर्स लिमिटेड ने इस मामले में हुई अनियमितता को उजागर करने में मदद की थी। उसने बोर्ड को बताया कि प्रसारण शुल्क को एक अपरिचित खाते में स्थानांतरित करने के लिए कहा गया था।
दिसानायके ने 2017 में चंद्रमौली कोराले की जगह श्रीलंका के वित्त विभाग के प्रमुख का कार्यभार संभाला था। वे इंग्लैंड दौरे के प्रसारण शुल्क संबंधी शुरुआती आरोप सामने आने के समय बतौर सीएफओ काम कर रहे थे। तब उन्होंने दावा किया था कि उनका बैंक अकाउंट हैक किया गया है। हालांकि, बाद में जांच में उनका दावा गलत निकला।
इसके बाद श्रीलंका क्रिकेट ने बोर्ड ने अपने बही-खातों पर नजर डालनी शुरू की। उसने वित्तीय भ्रष्टाचार होने के शक में अकाउंटिंग फर्म एर्नस्ट एंड यंग से 2013-2018 के लिए अपने 'मीडिया प्रसारण अधिकार और रसीदों और भुगतान' का ऑडिट कराया।
बातचीत में रेशमी ने ये भी कहा है कि उसने सीताराम के साथ प्रेम विवाह किया था, लेकिन शादी के 4 साल गुजर गए, न तो उसे कभी सास-ससुर का प्यार मिला और न ही ससुराल में किसी तरह का सम्मान मिला। हालत ये ये है कि आज ससुराल के प्रति उनका न तो कोई मोह है और न ही प्रेम। हां इतना जरूर है कि अपने सास-ससुर को भूख व इलाज के अभाव में वह कष्ट नहीं होने देंगी। शुरू से वह अपने पिता के घर मधुबन में हैं और वहीं रहेंगी।
बहू ने दुख दिया : शहीद सीताराम के पिता बृजनंदन उपाध्याय, माता व रामकिंकर उपाध्याय ने एसपी आवास पहुंच कर अपनी फरियाद रखी। कहा कि वे नेत्रहीन हैं और पत्नी हमेशा बीमार रहती हैं। न तो उनके पास खाने को अनाज है और न ही बीमार पत्नी का इलाज हो पा रहा है। ऐसे में बहू रेशमी उपाध्याय का यह प्रतिकार दु:ख पहुंचाता है और आगे जीने की तमन्ना भी खत्म हो चुकी है। एक तो बेटा चला गया, दूसरी ओर बहू का अत्याचार शोभा नहीं देता है
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