Thursday, December 6, 2018

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री पर्रिकर के स्वास्थ्य पर 7 दिसंबर तक मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने राज्य के प्रमुख सचिव को इस बारे में 7 दिसंबर तक हलफनामा पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी। हाईकोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता टी डीमेलो की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें गोवा के मुख्यसचिव से विशेषज्ञ डॉक्टरों से पर्रिकर की जांच कराकर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मांगी गई है।

पर्रिकर का घर में चल रहा है इलाज
पर्रिकर को पैन्क्रियाटिक कैंसर है। उन्होंने अमेरिका में इसका इलाज भी कराया था। लेकिन, 15 सितंबर को उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक महीने बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, अब उनका घर भी इलाज चल रहा है।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि बिना मुख्यमंत्री के राज्य की स्थति बदतर होती जा रही है। राज्य पिछले 9 महीने से बिना मुख्यमंत्री के चल रहा है। पार्टियां पर्रिकर के इस्तीफे और राज्य के लिए पूर्णकालिक मुख्यमंत्री की मांग कर रही हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के 14 विधायकों ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा भी किया था।

उधर, भाजपा साफ कर चुकी है कि पर्रिकर राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इसके बाद पर्रिकर घर और एम्स में मंत्रियों की कैबिनेट बैठक भी बुला चुके हैं। इसी हफ्ते पर्रिकर ने घर पर प्रशासनिक अफसरों की भी बैठक बुलाई थी। पर्रिकर ने राज्य में अटकी पड़ी भर्तियों को भी भरने का आदेश दिया था।

40 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में भाजपा के 14 विधायक हैं। एमजीपी (3), जीएफपी (3) और 3 निर्दलीय के समर्थन से भाजपा ने सरकार बनाई थी। कांग्रेस के 16 विधायक हैं।

इस ड्रैग रेस में कुछ रोड-लीगल कारें जैसे टेस्ला मॉडल S P100DL, एक Lotus Evora GT430 और नई Aston Martin Vantage भी मौजूद थीं. यहां एक रनवे पर प्राइवेट जेट मौजूद था तो दूसरे में F-16. बाकी तीसरे रनवे में बाकी सारी गाड़ियां मौजूद थीं. 

इसके बाद रेस की शुरुआत हुई. शुरू में F1 कार और Ninja H2R लगभग आगे-पीछे चल रही थीं. लेकिन अंत में बाजी कावासाकी की Ninja H2R ने मार ली.

Thursday, November 29, 2018

PAK में स्मार्टफोन से भी सस्ती मिलती है AK-47 राइफल?

अगर आपको अपनी सुरक्षा के लिए एक रिवॉल्वर खरीदनी हो, तो आपको लाइसेंस के लिए पुलिस और प्रशासन के चक्कर काटने होंगे. यदि लाइसेंस मिल गया, तो एक बढ़िया रिवॉल्वर खरीदने में भी एक से दो लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे. लेकिन क्या आप यह सोच सकते हैं कि कोई देश ऐसा भी है, जहां मोबाइल फोन की कीमत में आपको एके-47 राइफल मिल सकती है? ये हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ऐसी ही खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

ये तो सब जानते हैं कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है, जहां आतंकियों का हथियारों के साथ खुलेआम घूमना आम बात है, लेकिन क्या आपको पता है कि पाकिस्तान में एक जगह ऐसा भी है, जहां क्लाशनिकोव (AK-47) और एमपी सब मशीनगन जैसे ऑटोमेटिक हथियार स्मार्टफोन से भी कम कीमत पर बेचे जाते हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस खबर की हकीकत का पता लगाने के लिए 'आजतक' ने वायरल टेस्ट करने का फैसला किया. इसके मुताबिक पाकिस्तान के पेशावर शहर से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर एक ऐसा इलाका है, जहां आपको दुनिया की किसी भी बंदूक का मॉडल मिल जाएगा. यह दुनिया की सबसे सस्ती हथियारों की मंडी है. यहां पुलिस भी जाने से डरती है. इस जगह का नाम है दर्रा आदमखेल.

यह छोटा सा शहर पहाड़ों के बीच बसा है, जहां पर हथियारों की मशहूर मंडी लगती है. यहां ऑटोमेटिक और खतरनाक हथियार कौड़ियों के भाव बिकते हैं. पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर में ये एक कबाइली कस्बा है, यहां चप्पे-चप्पे पर हथियारों की दुकाने हैं और घर-घर में हथियार बनाने का काम होता है.

यहां बड़े से बड़े हथियार और छोटी से छोटी पिस्टल सिर्फ 4500 से 14000 पाकिस्तानी रुपये में मिल जाते हैं. यहां बनी रूस की एके-47 हो या बुल्गारिया की एमपी-5 की हू-ब-हू कॉपी महज 14 हजार पाकिस्तान रुपये में मिल जाती हैं. दर्रा आदमखेल के कारीगर रूसी, तुर्की और बुल्गारिया के हथियारों की टू-कॉपी बनाने में माहिर हैं. इतना ही नहीं, ये हथियार एक साल की गारंटी के साथ बेचे जाते हैं.

यहां के कारीगरों का दावा है कि उनके बनाए हथियार शानदार चलते हैं. पाकिस्तान के एक हथियार कारीगर गुल खिताब दावा करते हैं कि उन्होंने पिछले 10 वर्षों में 10 हज़ार गन बेची है, जिनमें अभी तक कोई शिकायत नहीं आई. आपको बता दें कि पाकिस्तान में स्मार्ट फोन से भी सस्ते रेट पर बिक रही बुल्गारिया की एमपी-5 गन को अमेरिका की एफबीआई स्वैट टीम इस्तेमाल करती है. गुल की बनाई बुल्गारिया की एमपी-5 गन महज 7 हज़ार रुपये में मिलती है, वो भी एक साल की गारंटी के साथ.

पाकिस्तान के दर्रा आदमखेल में अपराध अपने चरम पर है. यहां हथियारों का कारोबार कई पीढ़ियों से चला आ रहा है. हथियार बनाने का काम इस कस्बे में साल 1980 के बाद तेज़ी से बढ़ा. यहीं से हथियार खरीदकर मुजाहिद्दीन सोवियत संघ के खिलाफ अफगानिस्तान में जंग लड़ते थे. नवाज़ शरीफ की सरकार के वक्त हर जगह चेक प्वाइंट्स बना दिए गए थे, जिससे इस बिजनेस पर काफी असर पड़ा था. ये इलाका पाकिस्तान में तालिबान का गढ़ माना जाता है. यहां कबाइली शासन चलता है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह खबर सही पाई गई है.

Tuesday, October 23, 2018

श्रीलंका क्रिकेट का सीएफओ गिरफ्तार, वित्तीय धोखाधड़ी करने का है आरोप

श्रीलंका के आपराधिक जांच विभाग ने 165,000 डॉलर (करीब एक करोड़ 22 लाख रुपए) की वित्तीय धोखाधड़ी करने के मामले में देश के क्रिकेट बोर्ड के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) विमल नंदिका दिसानायके को गिरफ्तार कर लिया है। इस साल जुलाई-अगस्त में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुई घरेलू सीरीज में बोर्ड को मिलने वाली ब्रॉडकॉस्टिंग फीस (प्रसारण शुल्क) की कुछ रकम का हिसाब नहीं मिला था। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई उसी सिलसिले में की गई है।

सामने आया 41 करोड़ रुपए के गबन का मामला
इंग्लैंड के खिलाफ चल रही सीरीज में प्रसारण शुल्क में से 55 लाख डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपए) के गबन की जांच शुरू होने के बाद यह जुलाई-अगस्त में हुई सीरीज में ब्रॉडकॉस्टिंग फीस के घपले का मामला सामने आया है।

ब्रॉडकॉस्टर सोनी पिक्चर्स लिमिटेड ने इस मामले में हुई अनियमितता को उजागर करने में मदद की थी। उसने बोर्ड को बताया कि प्रसारण शुल्क को एक अपरिचित खाते में स्थानांतरित करने के लिए कहा गया था

दिसानायके ने 2017 में चंद्रमौली कोराले की जगह श्रीलंका के वित्त विभाग के प्रमुख का कार्यभार संभाला था। वे इंग्लैंड दौरे के प्रसारण शुल्क संबंधी शुरुआती आरोप सामने आने के समय बतौर सीएफओ काम कर रहे थे। तब उन्होंने दावा किया था कि उनका बैंक अकाउंट हैक किया गया है। हालांकि, बाद में जांच में उनका दावा गलत निकला।

इसके बाद श्रीलंका क्रिकेट ने बोर्ड ने अपने बही-खातों पर नजर डालनी शुरू की। उसने वित्तीय भ्रष्टाचार होने के शक में अकाउंटिंग फर्म एर्नस्ट एंड यंग से 2013-2018 के लिए अपने 'मीडिया प्रसारण अधिकार और रसीदों और भुगतान' का ऑडिट कराया।

बातचीत में रेशमी ने ये भी कहा है कि उसने सीताराम के साथ प्रेम विवाह किया था, लेकिन शादी के 4 साल गुजर गए, न तो उसे कभी सास-ससुर का प्यार मिला और न ही ससुराल में किसी तरह का सम्मान मिला।  हालत ये ये है कि   आज ससुराल  के प्रति उनका न तो कोई मोह है और न ही प्रेम। हां इतना जरूर है कि अपने सास-ससुर को भूख व इलाज के अभाव में वह कष्ट नहीं होने देंगी। शुरू से वह अपने पिता के घर मधुबन में हैं और वहीं रहेंगी।

बहू ने दुख दिया : शहीद सीताराम के पिता बृजनंदन उपाध्याय, माता व रामकिंकर उपाध्याय ने एसपी आवास पहुंच कर  अपनी फरियाद रखी। कहा कि वे नेत्रहीन हैं और पत्नी हमेशा बीमार रहती हैं। न तो उनके पास खाने को अनाज है और न ही बीमार पत्नी का इलाज हो पा रहा है। ऐसे में बहू रेशमी उपाध्याय का यह प्रतिकार दु:ख पहुंचाता है और आगे जीने की तमन्ना भी खत्म हो चुकी है। एक तो बेटा चला गया, दूसरी ओर बहू का अत्याचार शोभा नहीं देता है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री पर्रिकर के स्वास्थ्य पर 7 दिसंबर तक मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने राज्य के प्रमुख सचिव को इस बारे में...